Brinjal Health Benefits and Side
भारत में प्राचीन काल से ही बैंगन (Brinjal or Baingan) लगभग सब जगह उगाया और खाया जाता रहा है. बैंगन की सब्जी या भुर्ता लगभग सब लोग खाते हैं. वैसे तो बैंगन बहुत आम सी दिखने वाली सब्जी है, लेकिन इसमें काफी गुण हैं. बैंगन का स्वाद जितना अच्छा है, उतना ही यह सेहत के लिए भी अच्छा है.
बैंगन की लोकप्रियता, स्वाद और गुण सर्दियों के मौसम तक ही सीमित रहती है, इसलिए बैंगन को सर्दियों की सभी शाक-सब्जियों का राजा भी कहा जाता है. गर्मियों के आते ही इसका स्वाद और गुण दोनों ही बदल जाते हैं.
सालभर में बैंगन की दो फसलें होती हैं- शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन. इसके पौधे दो-ढाई फीट की ऊंचाई तक बढ़ते हैं, जिन पर कांटे भी होते हैं. इसके फूलों का रंग भी बैंगनी होता है. सूरत जिले में ताप्ती नदी की रेतीली जमीन पर उगाए जाने बैंगन बहुत प्रसिद्ध हैं.
रंग और आकार के आधार पर बैंगन की कई किस्में होती हैं, जिनमें से प्रमुख हैं- काली और सफेद. काले बैंगन ज्यादा गुणकारी माने जाते हैं. इसी प्रकार, लंबे बैंगन और गोल बैंगन, बहुत ज्यादा बीज वाले बैंगन और कम बीज वाले बैंगन, कड़क बैंगन और मुलायम बैंगन जैसी भी किस्में होती हैं.
बैंगन का भुर्ता- लोग बैंगन के भुर्ते को अपनी-अपनी पसंद के अनुसार बनाते हैं. कुछ लोग सिंपल भुर्ता यानी भूनकर, उसमें टमाटर-प्याज-धनिया काटके मिलाकर, नमक-मिर्च मिलाकर खाते हैं, तो कुछ लोग भूनकर, फिर तेल में टमाटर-प्याज-अदरक-लहसुन जैसी कई सब्जियों के साथ छोंककर बनाते हैं और बड़े शौक से खाते हैं. इस तरह बनाया गया बैंगन का भुर्ता बड़ा ही स्वादिष्ट होता है.
बैंगन के फायदे और नुकसान
(Advantages and disadvantages of brinjal)
बैंगन मधुर, तीक्ष्ण, गर्म, क्षारीय, पित्त न करने वाले, ज्वर, वायु और कफ को मिटाने वाले, अग्नि को प्रदीप्त करने वाले, वीर्यवर्धक और हल्के होते हैं. बैंगन मूत्रवर्धक भी है. बैंगन में कार्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन, और अन्य क्षार, विटामिन A, B2, C और आयरन है.
बैंगन में कैलोरी कम और फाइबर ज्यादा होता है, जो पाचन और चयापचय में सुधार करने में मदद करता है. यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ भी महसूस कराता है और ओवरईटिंग को रोकने में मदद करता है. बैंगन हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है. इसके एनाल्जेसिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण दर्द और सूजन को दूर करने में भी मदद कर सकते हैं.
बैंगन जितने ज्यादा कोमल हों, उतने ही ज्यादा गुणकारी और बलवर्धक माने जाते हैं. ज्यादा बीज वाले बैंगन नहीं खाने चाहिए. छोटे, कोमल और काम बीज वाले बैंगन कफ और पित्त को दूर करते हैं. जबकि जो बैंगन बड़े होकर कड़क हो गए हों, वे पित्त करने वाले होते हैं. कोमल या मुलायम बैंगन सब दोषों को दूर करते हैं.
बैंगन में तेल और नमक डालने पर वह भारी और स्निग्ध (चिकना) हो जाता है. बैंगन को ‘शाक नायक’ कहने वाले ‘क्षेम-कुतूहल’ ग्रंथ के रचियता वैद्य ने कहा है कि सर्दियों में तेल और हींग में बनाई गई बैंगन की सब्जी वायु प्रकृति वालों के लिए बहुत लाभकारी है. अंगारों पर भूनकर बनाया गया बैंगन का भुर्ता बहुत हल्का और अग्नि को प्रदीप्त करने वाला होता है. यह कफ, मेद, वायु और अमा को मिटाता है.
बैंगन की सब्जी, भुर्ता या सूप बनाकर, उसे हींग और लहसुन के साथ खाने से पेट के भीतर की वायु का जोर कम होता है और गुल्म मिटता है. कफ प्रकृति वालों और सम प्रकृति वालों के लिए सर्दियों में बैंगन का सेवन फायदेमंद है, क्योंकि बैंगन कफनाशक है. बैंगन और टमाटर का सूप पीने से मंदाग्नि मिटटी है.
सावधानी-
आरोग्य की दृष्टि से दीपावली से पहले बैंगन नहीं खाने चाहिए. सर्दियों में भी पित्त प्रकृति वालों, अम्लपित्त वालों और सगर्भा स्त्रियों को बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए. बैंगन के ज्यादा सेवन से बचना चाहिए, नहीं तो इससे पेट में परेशानी हो सकती है. बैंगन की सब्जी को बहुत ज्यादा मसालेदार न बनाएं.
♦ सेहत की डायरी (1)
♦ सेहत की डायरी (2)
Copyrighted Material © 2019 - 2024 Prinsli.com - All rights reserved
All content on this website is copyrighted. It is prohibited to copy, publish or distribute the content and images of this website through any website, book, newspaper, software, videos, YouTube Channel or any other medium without written permission. You are not authorized to alter, obscure or remove any proprietary information, copyright or logo from this Website in any way. If any of these rules are violated, it will be strongly protested and legal action will be taken.
Be the first to comment