Meenakshi Amman Temple Madurai
हर चीज की एक सीमा हो सकती है, लेकिन हमारे भारत के प्राचीन मंदिरों (Ancient Temples of India) की सुंदरता और उन्हें देखने वालों के आश्चर्य की कोई सीमा नहीं होती. इन मंदिरों को देखने और छूने वाले के दिमाग में केवल एक ही बात आती है कि इन्हें बनाने वाले कारीगर और मजदूर साधारण लोग तो नहीं रहे होंगे. इन्हीं मंदिरों में से एक है मदुरै का मीनाक्षी मंदिर (Meenakshi Temple, Madurai), जिसकी सुंदरता और भव्यता का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता है… और इसलिए हम यहां ऐसा कोई असफल प्रयास करेंगे भी नहीं. आइये अब बात करते हैं इस मंदिर के बारे में-
Shri Meenakshi-Sundareshwara Temple, Madurai
भारत के तमिलनाडु राज्य के ऐतिहासिक शहर मदुरै का नाम सुनते ही किसी भी भक्त के दिमाग में सबसे पहली बात पौराणिक नदी वैगई (Vaigai River) के तट पर स्थित मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर (Madurai Meenakshi Amman Temple) की आती है. मंदिर के मुख्य देवी-देवता देवी मीनाक्षी (मां पार्वती) और उनके पति भगवान सुंदरेश्वर (भगवान शिव) हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव सुंदरेश्वर रूप में अपने गणों के साथ पांड्य राजा मलयध्वज की पुत्री राजकुमारी मीनाक्षी से विवाह रचाने के लिए मदुरै नगर में आए थे, जो देवी पार्वती जी का अवतार हैं.
स्वयंभू शिवलिंग (Swayambhu Shivling)-
कहा जाता है कि पहले इस शहर का नाम ‘मधुरापुरी’ (मधु का शहर) था, लेकिन समय बीतने के साथ इसका नाम ‘मदुरै’ हो गया. मदुरै शहर को ‘थूंगानगरम’ कहा जाता है जिसका अर्थ है ‘वह शहर जो कभी नहीं सोता’. श्री मीनाक्षी अम्मन की मूर्ति हरे काले पत्थर से बनी है. कहा जाता है कि भगवान सुंदरेश्वर का प्रतीक शिवलिंग भारत में पूजे जाने वाले 68 स्वयंभू शिवलिंगों में से एक है, यानी जो मानव निर्मित नहीं हैं.
मंदिर का एक गर्भगृह भगवान सुंदरेश्वर यानी भगवान शिव को समर्पित है, तो वहीं दूसरा उनकी पत्नी देवी मीनाक्षी को. मंदिर के गर्भगृह के ठीक बाहर देवी मीनाक्षी के बाद एक विशाल मूर्ति भगवान गणेश जी की है. यह मूर्ति कम से कम 1500 साल पहले की मानी जाती है. इसकी खोज राजा थिरुमलाई नायक ने इसके जीर्णोद्धार के लिए मंदिर क्षेत्र की खुदाई के दौरान की थी. देवी मीनाक्षी के गर्भगृह से बाहर आने के बाद शिवलिंग की हाल ही में चित्रित 3-आयामी छवि (3-Dimensional Image) को देखने के लिए छत की ओर देखना चाहिए.
मदुरै का सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल
भारत में सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक श्री मीनाक्षी-सुंदरेश्वर मंदिर मदुरै में सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल है. यह मंदिर देवी पार्वती जी के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है. मां पार्वती जी के प्रति लोगों की भक्ति ऐसी है कि कोई भी व्यक्ति जो इस शहर का दौरा करता है, वह बिना उनका आशीर्वाद लिए यहां से जाने के बारे में सोचता भी नहीं है. मीनाक्षी मंदिर द्रविड़ शैली की वास्तुकला की एक अद्भुत कृति है.
मंदिर के संगीतमय खम्भे
जैसे ही कोई श्रृद्धालु मीनाक्षी मंदिर के परिसर में प्रवेश करता है, वह आध्यात्मिक खिंचाव और मन की शांति की भावना महसूस करने लगता है. मंदिर के हॉल में से एक हॉल ‘1,000 स्तंभों के हॉल’ के रूप में प्रसिद्ध है, हालांकि इसमें आज केवल 985 स्तंभ ही मौजूद हैं. कहा जाता है कि आप जिस भी दिशा से इन खंभों को देखते हैं, वे हमेशा एक सीधी रेखा में ही लगते हैं. मंदिर का एक और मुख्य आकर्षण सबसे बाहरी गलियारा है जिसमें संगीतमय स्तंभ हैं. टैप करने पर इनमें से अलग-अलग संगीतमई ध्वनि निकलती है.
मीनाक्षी मंदिर में ‘सुनहरे कमल वाला तालाब’
मंदिर के पवित्र टैंक को ‘पोटरामराई कुलम’ नाम दिया गया है, जिसका अर्थ है ‘सुनहरे कमल वाला तालाब’ (Potramaraukulam or Golden Lotus Tank). यह एक प्राचीन जलप्रपात है जहां भक्त पवित्र स्नान करते हैं. इसे आदि तीर्थम, शिव गंगा, उत्तम थीर्थम, ज्ञान थीर्थम और मुक्ति थीर्थम भी कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि तालाब का निर्माण शुरू में स्वयं भगवान शिव ने किया था. यह टैंक चित्रा मंडप नामक गलियारों से घिरा हुआ है, जिसमें भगवान के दिव्य खेलों की मूर्तियां हैं.
मीनाक्षी मंदिर के गोपुरम
मीनाक्षी मंदिर को 2500 साल पुराने प्राचीन शहर का शहर केंद्र माना जाता है. प्राचीन अभिलेखों से पता चलता है कि मीनाक्षी मंदिर शहर का केंद्र था, जहां से सड़कें सभी दिशाओं में फैलती थीं. मीनाक्षी मंदिर मंदिर में चार मुख्य प्रवेश द्वार हैं, प्रत्येक मुख्य दिशा में एक. प्रत्येक मुख्य प्रवेश द्वार के चार गोपुरम कई देवी-देवताओं, पवित्र जानवरों और यहां तक कि राक्षसों की जटिल नक्काशीदार मूर्तियों से भरे हुए हैं.
उनमें से सबसे ऊंचा गोपुरम 170 फीट (52 मीटर) की ऊंचाई पर दक्षिण टॉवर है, जिसका निर्माण 1559 में हुआ था. इनमें से पूर्वी मीनार सबसे पुरानी है, जिसका निर्माण 1238 में हुआ था. देवी मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर के मंदिर को एक सुनहरे विमानम या शिखर द्वारा टॉप पर कवर किया गया है. भीतरी गलियारों की छतें बहुत ही रंगीन और खूबसूरत हैं और देखने वालों के लिए एक अद्भुत दृश्य बनाती हैं. एक अनुमान के मुताबिक, मंदिर परिसर में लगभग 33,000 उत्कृष्ट मूर्तियां हैं.
विश्व का एक आश्चर्य है मीनाक्षी मंदिर
मीनाक्षी मंदिर वास्तुकला और शिल्पकला का एक आश्चर्य है. मंदिर परिसर के भव्य 14 गोपुरम विस्मयकारी और बहुत ही जटिल नक्काशीदार हैं. मंदिर के कई मंडप जैसे हजार स्तंभ मंडपम, अष्ट शक्ति मंडपम, कंबतदी मंडपम, पुथु मंडपम, वीरवसंथाराय मंडपम, कल्याण मंडपम, मुदली पिल्लई मंडपम और मांगयारकरसी मंडपम भगवान शिव और मां पार्वती जी की कई कहानियां बताते हैं.
मीनाक्षी मंदिर की स्थापत्य और वास्तुकला आश्चर्यचकित कर देने वाली है, जिस कारण यह आधुनिक विश्व के टॉप 30 आश्चर्यों की लिस्ट में पहले स्थान पर है. द्रविड़ वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण यह मंदिर एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है, जो अच्छी तरह से रखे बगीचों और प्राचीन फव्वारों से घिरा है. मीनाक्षी मंदिर में भगवान सुंदरेश्वर का मंदिर, मंदिर के कुल क्षेत्रफल का एक चौथाई हिस्सा है, जबकि देवी मीनाक्षी का मंदिर भगवान सुंदरेश्वर के मंदिर के क्षेत्रफल का एक चौथाई हिस्सा है.
मीनाक्षी मंदिर का निर्माण और उस पर आक्रमण
मीनाक्षी मंदिर परिसर की वर्तमान संरचना मुख्य रूप से 15वीं शताब्दी में राजा थिरुमलाई नायकर के शासनकाल के दौरान मदुरै के नायकों द्वारा बनाई गई थी. हालांकि, मूल मंदिर 7वीं शताब्दी से है. यह तमिल संत थिरुग्ननसंबंदर के कार्यों से स्पष्ट होता है, जिन्होंने सातवीं शताब्दी के अपने कार्यों में देवता और मंदिर की प्रशंसा की है. कहा जाता है कि मूल मंदिर का निर्माण 6वीं से 7वीं शताब्दी के प्रारंभ में पांड्य राजा कुलशेखर द्वारा किया गया था.
इतिहासकारों के मुताबिक, 14वीं शताब्दी में, पांड्य वंश के पतन के बाद सिंहासन के उत्तराधिकार पर एक आंतरिक असामंजस्य उत्पन्न हुआ. विवाद का फायदा उठाकर दिल्ली सल्तनत के अलाउद्दीन खिलजी ने 1310 में मदुरै पर आक्रमण करने के लिए अपने सेनापति मलिक काफूर को भेजा. उसने दक्षिण की ओर प्रस्थान करते समय रास्ते में पड़ने वाले शहरों और छोटे राज्यों को खूब लूटा. जब वे मदुरै पहुंचे, तो उन्होंने मंदिर की मीनारों को गिरा दिया और कई मूर्तियों और ऐतिहासिक अभिलेखों को नष्ट कर दिया. हालांकि, मीनाक्षी अम्मन और भगवान सुंदरेश्वर का मुख्य मंदिर बरकरार रहा.
मीनाक्षी मंदिर का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण राजा विश्वनाथ नायक के अधीन शुरू हुआ. 1623-1655 के दौरान थिरुमलाई नायक के शासनकाल में मीनाक्षी मंदिर को अपनी वर्तमान स्थिति में विस्तारित किया गया था. प्राचीन मंदिर तालाब के गलियारों के साथ-साथ मीनाक्षी नायक मंडपम का निर्माण प्रसिद्ध और बहादुर रानी मंगम्मल द्वारा किया गया था, जो प्राचीन भारत की महिला शासकों में से एक थीं.
मदुरै के मीनाक्षी मंदिर का समय
(Meenakshi Temple in Madurai Timings)-
मदुरै का मीनाक्षी मंदिर सुबह 5 बजे खुलता है और रात 9:30 बजे बंद हो जाता है. यह दोपहर 12:30 बजे से शाम 4 बजे तक बंद रहता है. मंदिर में रोजाना छह बार पूजा होती है. प्रत्येक पूजा में देवताओं का अभिषेकम, अलंगारम (आभूषणों के साथ सजावट), नैवेद्यम (भोजन की पेशकश) और दीपा अरदानई (दीपों के साथ आरती) शामिल हैं.
भक्त भीड़ के आधार पर मुफ्त दर्शन या फीस के साथ दर्शन का विकल्प चुन सकते हैं. दिव्यांग व्यक्तियों और उनके एक साथी को एक विशेष प्रवेश द्वार के माध्यम से दर्शन करने की अनुमति होती है. इस मंदिर में पुरुषों और महिलाओं को ढंग के कपड़ों में ही प्रवेश करने की सलाह दी जाती है. देवी मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर के मुख्य गर्भगृह केवल हिंदुओं के लिए खुले हैं. अन्य लोग मंडपम और मंदिर की अन्य स्थापत्य विशेषताओं को देख सकते हैं.
मीनाक्षी मंदिर में मनाए जाने वाले त्योहार-
मीनाक्षी मंदिर में ‘चित्तिराई ब्रह्मोत्सवम’ यानी भगवान सुंदरेश्वर और देवी मीनाक्षी के विवाह का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस दौरान यह मंदिर रोशनी ने नहा जाता है. इसके आलावा, यहां ‘आवनी त्योहार’ (राजा के रूप में भगवान सुंदरेश्वर के राज्याभिषेक), नवरात्रि, तप्पोत्सवम, मासी मंडला त्योहार, कांडा षष्ठी, दीपावली, ओंजल त्योहार, आदि मूलाइकोट्टू त्योहार, वसंतोत्सवम, अरुधरा दर्शनम, थिरुवेनबावई और थिरुप्पवई त्योहार आदि पर्व भी बड़ी धूम रहती है.
कैसे पहुंचें मदुरै
(How to Reach Madurai)
भारतीय प्रायद्वीप में मौजूद सबसे पुराने शहरों में से एक मदुरै सांस्कृतिक विरासत के मामले में समृद्ध है. मदुरै का हवाई अड्डा चेन्नई और मुंबई सहित भारत के कई शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. निकटतम रेलवे स्टेशन मदुरै रेलवे जंक्शन है जो भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ता है.
इसी के साथ, मदुरै भारत के सभी प्रमुख शहरों और कस्बों से अच्छी मोटर योग्य सड़कों और राजमार्गों से जुड़ा हुआ है. कई प्राइवेट बस ऑपरेटर देर रात तक इस पवित्र शहर के लिए नियमित बसों का संचालन करते हैं.
इस शहर में ठहरने के लिए हर बजट में आवास की अच्छी व्यवस्था है. यहां फाइव स्टार होटल्स से लेकर कम लागत वाले लॉज और होटलों तक ठहरने के लिए बड़ी संख्या में विकल्प मौजूद हैं. मदुरै में दिन और रातभर शहर आने वाले सभी लोगों के लिए हर तरीके के पाक व्यंजन पेश किए जाते हैं.
मीनाक्षी मंदिर के आसपास के मंदिर-
थिरुप्परकुंराम मुरुगन मंदिर (भगवान मुरुगन यानी कार्तिकेय जी को समर्पित), पझामुदिरचोलाई मुरुगन मंदिर (भगवान मुरुगन को समर्पित), अलगर कोविल (भगवान विष्णु को समर्पित), वंदियूर मरिअम्मन मंदिर (देवी मरिअम्मन और देवी दुर्गा को समर्पित), योग नरसिम्हा पेरुमल मंदिर (भगवान विष्णु नरसिंह रूप में), थिरुमोहूर चक्रथलवर मंदिर (भगवान विष्णु को समर्पित) आदि मीनाक्षी मंदिर के आसपास स्थित अन्य बेहद खूबसूरत और प्रसिद्ध मंदिर हैं.
कांचीपुरम का अद्भुत कैलाशनाथ मंदिर
चोलों का शक्ति का प्रतीक बृहदेश्वर या राजराजेश्वर मंदिर
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